हां मैं ब‍िहारी हूं!

मैं उस माटी में जन्मा हूं, जो बुद्ध और महावीर की धरती है.

ब‍िहार की माटी.
ब‍िहार. 
बुद्ध और महावीर की धरती. 
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्राचीन शहर पाटल‍िपुत्र प्राचीन महानगरों के रूप में पूरी दुनिया में विख्यात रहा. इसका गौरवशाली इतिहास 600 ईसा पूर्व से. इसने सम्राट अशोक का शासन देखा, मौर्यकालीन गौरव देखा जब चन्द्रगुप्त ने भारत की सीमाएं काबुल तक पहुंचाई, चाणक्य की राजनीति और अर्थशास्त्र देखा, बुद्ध और जैन धर्म का ज्ञान और प्रसार देखा. ब‍िहार के रहन-सहन की चर्चा चीनी यात्रियों व्हेनसांग और फाहियान के यात्रा वृतांतों में मिलता है. सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह का जन्मस्थल पटना साह‍िब.

बिहार की सरजमीं पर ऐसे शासकों का उदय हुआ, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और बुद्धि से ना सिर्फ बिहार बल्कि लगभग समूची दुनिया पर शासन किया. चंद्रगुप्त मौर्य हों या बिंदुसार, या फिर सम्राट अशोक, सभी ने जिद की और अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया.
मुस्लिम शासनकाल में फारसी की पढ़ाई का केंद्र रहा पाटल‍िपुत्र और अंग्रेजों के आने के बाद यह आधुनिक शिक्षण का केंद्र रहा. नालंदा, विक्रमशिला को कौन भूल सकता है. आज दुनियाभर में जिस गणतंत्र को अपनाया जा रहा है, वह वैशाली के लिच्छवी शासकों की देन. दुन‍िया की पहली यून‍िवर्स‍िटी नालंदा की लाइब्रेरी दुनियाभर में मशहूर. कला एवं शिल्प की विरासत गौरवपूर्ण एवं समृद्ध रही बिहार में. यहां की मधुबनी पेंटिंग और मिथिलांचल का भित्ति चित्रण भी दुनियाभर में मशहूर.


देश के पहले राष्ट्रपत‍ि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ब‍िहार की माटी के लाल थे तो सम्पूर्ण क्रांत‍ि का ब‍िगुल फूंकने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण, आंइस्टीन को चुनौती देने वाले भारतीय गणितज्ञ वश‍िष्ठ नारायण स‍िंह ब‍िहार में जन्मे, पले-बढ़े. चंपारण की धरती से राष्ट्रप‍िता महात्मा गांधी ने ब्रिटिश राज को चुनौती दी. हिंदी के बड़े साहित्यकारों के नाम की चर्चा जहां भी होती है, वहां रामधारी सिंह दिनकर, बाबा नागार्जुन, फणीश्वर नाथ रेणु का जिक्र जरूर आता है. ब‍िहार की धरती पर जन्में इन साहित्यकारों के नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं. अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले वीर बांकुरे बाबू वीर कुंवर सिंह पर हर ब‍िहारवासी को नाज़ है. 1857 की क्रांति में उम्र के चौथेपन के बावजूद उन्होंने अपने योद्धापन से अंग्रेजों के दांत खट्टे कर द‍िए थे.

कला और संस्कृति के क्षेत्र में बिहार की एक समृद्ध विरासत. यहां की कला और फिल्में दुनियाभर में पसंद की जाती हैं. बिहार के कलाकार दुनियाभर की तमाम भाषाओं में काम कर रहे हैं. बात भोजपुरी स‍िनेमा की हो या बॉलीवुड, ब‍िहारी कलाकारों ने अपनी प्रत‍िभा का लोहा मनवाया है. शत्रुघ्न स‍िन्हा, शेखर सुमन, मनोज वाजपेई सरीखे अभ‍िनेता बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाए हुए हैं तो प्रदेश को भ‍िखारी ठाकुर, शारदा स‍िन्हा, भरत शर्मा व्यास, मनोज त‍िवारी और पवन स‍िंह सरीखे कलाकारों पर भी नाज़ है. प्यार, दर्द और पर‍िश्रम की म‍िसाल दशरथ मांझी 'माउंटनमैन' के तौर पर मशहूर हुए.
ल‍िट्टी-चोखा, चूड़ा दही, तिलकुट...ब‍िहार के कुछ ऐसे व्यंजन जो अपने स्वाद से सबका मन मोह लेते हैं. यहां की शाही लीची दुनियाभर में मशहूर. छठ पूजा की तो बात ही न‍िराली है. ब‍िहारवास‍ियों का सबसे बड़ा पर्व. क‍िसी मूर्त‍ि की पूजा नहीं, बल्कि प्रकृत‍ि की पूजा. इसमें द‍िखती है वैदिक आर्य संस्कृति की एक छोटी सी झलक. हर साल कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगने वाला सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है. इस मेले को 'हरिहर क्षेत्र मेला' के नाम से भी जाना जाता है.

हमें अपने ब‍िहार पर नाज़ है...... 

जय ब‍िहार

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