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Showing posts from 2025
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NDA की बम्पर वापसी और महागठबंधन की दुर्गति क्यों हुई? बिहार का जनादेश आ गया है। पिछले 20 साल से बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर जनता ने फिर से भरोसा जताया है। दूसरी तरफ तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी नहीं चल सकी। वैसे तो एक्ज़िट पोल ने एनडीए की वापसी के संकेत दे दिये थे लेकिन इस तरह की बम्पर जीत का अंदाजा शायद एनडीए के नेताओं को भी नहीं होगा। चुनाव के नतीजे आने के बाद तमाम विश्लेषण भी आ रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं जो इन परिणामों की वजह रही हैं।     देखा जाए तो NDA की कामयाबी के पीछे मुख्य तौर पर तीन 'इंजन' रहे, जिन्होंने गठबंधन की जीत की राह आसान की।  1. 'साइलेंट वोटर' महिला शक्ति नीतीश कुमार जब से सीएम बने हैं, उनका फोकस महिला वोटरों पर रहा है। चाहे वो स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल बांटने की योजना हो या शराबबंदी। इन महिला केंद्रित योजनाओं ने NDA के पक्ष में एक मजबूत 'साइलेंट वोट बैंक' बनाया। शराबबंदी, जीविका, पंचायती राज में महिलाओं को आरक्षण और साइकिल/पोशाक योजना जैसी पहलें निर्णायक साबित हुईं। सर्वेक्षणों के मुताबिक, महिला मतदाताओं ने पुरुषों की तुल...

हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी

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तो आखिरकार, हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मणिपुर की ओर रुख करने का मन बना ही लिया! सितंबर के दूसरे हफ्ते में, लगभग ढाई साल की लंबी चुप्पी और अनगिनत "मणिपुर कहाँ है?" वाले सवालों के बाद, सूत्रों के हवाले से खबर है कि पीएम साहब मणिपुर की धरती पर कदम रख सकते हैं। वाह, क्या बात है! मणिपुर के लोग तो खुशी से झूम उठे होंगे, या शायद सोच रहे होंगे, "अरे, अब तो शांति की सैर कराने का समय आ गया, अब क्या फायदा?" मई 2023 से मणिपुर जल रहा है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा ने 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली, 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए, और राहत शिविरों में जिंदगी काट रहे हैं। मणिपुर की सड़कों पर तनाव, आंसू, और अनिश्चितता का माहौल है। लेकिन हमारे पीएम साहब? वो तो विश्व भ्रमण पर व्यस्त थे! घाना, त्रिनिदाद, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया—पांच देशों की सैर कर ली, BRICS समिट में चमक बिखेरी, लेकिन मणिपुर? अरे, वो तो नक्शे के उस कोने में है, जहाँ सिग्नल कमजोर पड़ जाता है, शायद इसलिए रडार पर नहीं आया। विपक्ष तो शुरू से चिल्ला रहा है, "मोदी जी, मणिपुर जाइए...
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 ट्रम्प का तुर्की को मिसाइल बेचने का फैसला – भारत क्यों चिंतित है? एक ऐसी खबर, जो भारत के लिए चिंता का सबब बन रही है। अमेरिका के नए ट्रम्प प्रशासन ने तुर्की को एडवांस्ड मिसाइल बेचने का फैसला किया है और इससे भारत की नींद उड़ गई है। आखिर ऐसा क्या है इस डील में? क्यों भारत को लग रहा है कि ये उसके लिए खतरा हो सकता है? चलिए, समझते हैं! ये कहानी शुरू होती है अमेरिका से, जहां ट्रम्प प्रशासन ने तुर्की को AMRAAM यानी Advanced Medium-Range Air-to-Air Missiles बेचने का ऐलान किया है। ये मिसाइलें हवा में दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराने के लिए इस्तेमाल होती हैं। ये इतनी एडवांस्ड हैं कि किसी भी देश की वायुसेना को ताकतवर बना सकती हैं। लेकिन भारत को इससे टेंशन क्यों हो रही है? क्योंकि तुर्की, जो अमेरिका का NATO सहयोगी है, उसका पाकिस्तान के साथ बहुत गहरा दोस्ताना है। भारत को डर है कि अगर तुर्की ने ये मिसाइलें पाकिस्तान को दे दीं, तो भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संतुलन बिगड़ सकता है। और ये कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तो आप सब जानते ही हैं। अब सवाल ये है कि भार...