हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी
तो आखिरकार, हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मणिपुर की ओर रुख करने का मन बना ही लिया! सितंबर के दूसरे हफ्ते में, लगभग ढाई साल की लंबी चुप्पी और अनगिनत "मणिपुर कहाँ है?" वाले सवालों के बाद, सूत्रों के हवाले से खबर है कि पीएम साहब मणिपुर की धरती पर कदम रख सकते हैं। वाह, क्या बात है! मणिपुर के लोग तो खुशी से झूम उठे होंगे, या शायद सोच रहे होंगे, "अरे, अब तो शांति की सैर कराने का समय आ गया, अब क्या फायदा?"
मई 2023 से मणिपुर जल रहा है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हिंसा ने 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली, 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए, और राहत शिविरों में जिंदगी काट रहे हैं। मणिपुर की सड़कों पर तनाव, आंसू, और अनिश्चितता का माहौल है। लेकिन हमारे पीएम साहब? वो तो विश्व भ्रमण पर व्यस्त थे! घाना, त्रिनिदाद, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया—पांच देशों की सैर कर ली, BRICS समिट में चमक बिखेरी, लेकिन मणिपुर? अरे, वो तो नक्शे के उस कोने में है, जहाँ सिग्नल कमजोर पड़ जाता है, शायद इसलिए रडार पर नहीं आया।
विपक्ष तो शुरू से चिल्ला रहा है, "मोदी जी, मणिपुर जाइए!" कांग्रेस के जयराम रमेश तो तंज कसते हुए कह गए, "सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर पीएम अब शायद मणिपुर के लिए टाइम निकाल लें।" पवन खेड़ा और चिदंबरम भी पीछे नहीं रहे, बार-बार पूछते रहे, "150 दिन में दुनिया घूम ली, मणिपुर क्यों नहीं?" लेकिन हमारे पीएम साहब के पास जवाब देने का समय कहाँ? वो तो "मन की बात" में व्यस्त थे, और शायद मणिपुर का "मन" उनकी बातों से बाहर रह गया।
अब खबर है कि 13 सितंबर को मणिपुर के साथ मिजोरम और असम की सैर भी होगी। मिजोरम में रेलवे लाइन का उद्घाटन, असम में भूपेन हजारिका की जयंती समारोह, और मणिपुर में? शायद चार घंटे की रस्मी मुलाकात, इंफाल और चुराचांदपुर में कुछ भाषण, राहत शिविरों का दौरा, और फिर वापसी। कांगला फोर्ट और पीस ग्राउंड में भव्य आयोजन की तैयारी जोरों पर है। मानो मणिपुर की सारी समस्याएँ एक "VVIP" दौरे से हल हो जाएँगी। सिक्योरिटी टाइट, सड़कें चमकाई जा रही हैं, और SPG भी अलर्ट पर है। लेकिन सवाल यह है—क्या यह दौरा मणिपुर के जख्मों पर मरहम लगाएगा, या सिर्फ एक और फोटो-ऑप होगा?
कुकी समुदाय के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पीएम साहब उनकी बात सुनेंगे, राहत शिविरों में जाएँगे, और शायद कुछ ठोस कदम उठाएँगे। मैतेई समुदाय भी चाहता है कि कोई "सिग्निफिकेंट स्टेप" लिया जाए। लेकिन मणिपुर की जटिल समस्या का हल क्या इतना आसान है? हिंसा की जड़ में जमीन, संसाधन, और ST स्टेटस का विवाद है। बीजेपी की अपनी ही सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की आलोचना हो रही है। राष्ट्रपति शासन लागू है, और अब नई सरकार की बातें भी चल रही हैं। लेकिन क्या पीएम का यह दौरा इन सब मुद्दों को सुलझा पाएगा, या फिर यह
सिर्फ एक "टाइमली पॉलिटिकल जेस्चर" है, जैसा कि कुछ लोग कह रहे हैं?
मणिपुर के लोगों ने "मोदी, कहाँ हो?" के पोस्टर तक लगा दिए थे। अब जब वो आ रहे हैं, तो शायद कुछ लोग कहें, "*हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी*!" दो साल से ज्यादा का इंतजार, 260 से ज्यादा मौतें, और हजारों की बर्बादी के बाद यह दौरा कितना असरदार होगा? क्या यह सिर्फ एक और "मास्टरस्ट्रोक" है, या वाकई मणिपुर के लिए नई सुबह लाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, मणिपुर की जनता शायद यही कह रही है, "आप तो आए, पर अब क्या बदलेगा?"

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