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हां मैं ब‍िहारी हूं!

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मैं उस माटी में जन्मा हूं, जो बुद्ध और महावीर की धरती है. ब‍िहार की माटी. ब‍िहार.  बुद्ध और महावीर की धरती.  सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्राचीन शहर पाटल‍िपुत्र प्राचीन महानगरों के रूप में पूरी दुनिया में विख्यात रहा. इसका गौरवशाली इतिहास 600 ईसा पूर्व से. इसने सम्राट अशोक का शासन देखा, मौर्यकालीन गौरव देखा जब चन्द्रगुप्त ने भारत की सीमाएं काबुल तक पहुंचाई, चाणक्य की राजनीति और अर्थशास्त्र देखा, बुद्ध और जैन धर्म का ज्ञान और प्रसार देखा. ब‍िहार के रहन-सहन की चर्चा चीनी यात्रियों व्हेनसांग और फाहियान के यात्रा वृतांतों में मिलता है. सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह का जन्मस्थल पटना साह‍िब. बिहार की सरजमीं पर ऐसे शासकों का उदय हुआ, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और बुद्धि से ना सिर्फ बिहार बल्कि लगभग समूची दुनिया पर शासन किया. चंद्रगुप्त मौर्य हों या बिंदुसार, या फिर सम्राट अशोक, सभी ने जिद की और अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया. मुस्लिम शासनकाल में फारसी की पढ़ाई का केंद्र रहा पाटल‍िपुत्र और अंग्रेजों के आने के बाद यह आधुनिक शिक्षण का केंद्र रहा. नालंदा, विक्रमशिला को कौन भूल सक...

2019 को बाइपास क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने बीते 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश की जनता को चौथी बार संबोधित किया. तमाम बातों के दौरान उन्होंने देशवासियों को 'न्यू इंडिया' का सपना दिखाया. उन्होंने 'न्यू इंडिया' के इस सपने को 2022 तक साकार करने के लिए जुट जाने का आह्वान भी किया. 2017 में अगर 2022 की बात अगर पीएम कर रहे हैं तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि वो 2019 को बायपास कर रहे हैं. क्योंकि अभी तो इस पर होनी चाहिए कि 2014 में जो वादे किए गए थे, सपने दिखाए गए थे, वो किस हद तक 2019 में पूरे हो रहे हैं? उनकी प्रोग्रेस क्या है? 2019 में आम चुनाव होने हैं. जब चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री भाषण देने मंच पर पहुंचेंगे तो क्या उस वक्त वो 2019 तक सरकार ने क्या किया, इस पर बात नहीं करेंगे? उस वक्त भी 2022 तक 'न्यू इंडिया' बनाने की बात होगी? 16 मई 2014 को आम चुनाव के नतीजे आए तो देश की जनता को नए नेतृत्व से तमाम उम्मीदें बंधी. बंधनी भी चाहिए थी. चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी ने लोगों को हसीन सपने जो दिखाए थे. यूपीए सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में जिन-जिन मुद्दो...

परिचय

फिलहाल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. कानून की डिग्री भी ली है, लेकिन वकालत की प्रैक्टिस नहीं की.